محفل زیشان...महफिल ऐ जीशान
خوش آمدید स्वागतम...स्वागतम ...خوش آمدید
Sunday, July 22, 2012
एक परछाई जो इंसान के साथ हमेशा रहती है खुद्दारी की शकल में ,ईमानदारी की शकल में,या यूँ कहलें,,,,,,,
ज़मीर
की शकल में...!!!
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