Sunday, July 22, 2012

अल्लाह का अनमोल तोहफा .................माँ - बाप..............कभी भी इनका दिल नहीं दुखाना चाहए ...........!!!
ज़ुल्म तो इंसान की फ़ितरत है ,,,तभी तो वो खुद अपनी ही जान पर ज़ुल्म करता रहता hai...!!!
एक परछाई जो इंसान के साथ हमेशा रहती है खुद्दारी की शकल में ,ईमानदारी की शकल में,या यूँ कहलें,,,,,,,ज़मीर की शकल में...!!!
रमज़ान की अफादियत को हम लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं कर सकते ....क्यूँ की रोज़ा का कोई बदला नहीं ....ये ऐसी इबादत है जिसका बदला अल्लाह खुद है ...!!!